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संगीत

साधारण भाषा में गायन को ही संगीत कहा जाता है परंतु वास्तव में गायन, वादन और नृत्य इन तीनों के समावेश को संगीत कहते हैं | ये तीनों ही कलाएँ स्वत्रंत होते हुए भी एक- दूसरे पर किसी न किसी रूप में आश्रित हैं |      ' गीत ' शब्द में ' सम् ' शब्द लगतार ' संगीत ' शब्द की उत्पत्ति होती है | इसका अर्थ है की अच्छा गीत जो कर्णप्रिय हो , लोगो का मनोरंजन कर सके |       जब हम शब्द , स्वर और लय के माध्यम से अपना ह्रदय की भावनाओं को प्रकट करते हैं तो उसे गायन कहा जाता है | गायन , वादन और नृत्य इन तीनों कलाओं के संबंध में यह कहा जाता है कि गायान के आधीन वादन और वादन के आधीन नृत्य है | इस कारण गायन प्रधान माना गया है |  यह इस श्लोक से सार्थक होता है : Indian Instruments                                                           " नृत्यं वाद्यानुगं प्रोक्तं बाधं गीतनुवृत्ति च |         ...

संगीत सभी ललित कलाओं में सर्वश्रेष्ठ

मानवीय भावनाओं की सुंदर अभिव्य़क्ति का साकार रूप ही कला है । विकास के साथ- साथ मानव की कल्पना प्रकृति को सुंदर रूप देने की चेष्टा करने लगी । उसकी इस चेष्टा को अधिकाधिक दिव्य व सौंदर्यमयी बनाने के लिए ललित कलाओं का जन्म हुआ तथा ये कलाएँ निम्न रूप में प्रस्तुत हुईं  - भवन निर्माण के रूप में वास्तुकला | भावों को मूर्ति के रूप में व्यक्त करने पर मुर्तिकला |  प्रकृति के दृश्यों को चित्रफलक पर उतारने पर चित्रकला |  शब्द तथा भाषा के माध्यम से भाव व्यक्त करने पर काव्यकला  |   सप्त स्वरों के माध्यम से भाव व्यक्त करने पर संगीत काला |  यह सर्वविदित है कि संगीत सभी ललित कलाओं में प्राचीन है | जब मनुष्य ने भाषा नहीं सीखी थी किसी - न - किसी रूप में संगीत था | आदिमानव भी अपने ह्रदय के उद्गार , खुशी अदि गुनगुनाकर व्यक्त करता था | जिस प्रकार चिडयों को चहचहाना एवं बालक को रोना स्वतः ही आ जाता है , उसी प्रकार मनुष्य को गुनगुनाना , नाचना आदि स्वतः ही आता है | ऐसा मना गया है कि अन्य कालाओं का जन्म बाद में हुआ | इन सभी ललित कलाओं के लिए भौतिक साधनों तथा उपकरणों ...